मेरी कलम से....
न जाने कितनों को सुना होगा रात ने,
ना कुछ समझाया, ना कुछ कहा,
और ना झुठलाया होगा,
बिना किसी राय के.....
बस सुना होगा ||
Mssst ...
Mssst ...
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