ए अंधेरे सुन ,
अब डर नहीं लगता तुझसे
ज़िंदगी का अपनी,तुझे राज़दार बनाया है।
सब कुछ जानता है तू,
तुझे हर गम का हिस्सेदार बनाया है
सुना है, अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं देता,
फिर कैसे तू सब कुछ देख लेता है ?
लोग समझाने से भी नहीं समझते
कैसे तू बिना कहे सब जान लेता है ।
मेरी कलम से....