Friday, September 18, 2015

" रक्षाबन्धन "

अपनत्व, सहयोग, प्यार का दिन वो ऐसा आता है,
लबों पे लाके मुसकान वो धागा कलाई पे बंध जाता है !!
भाई - बहन का असीम स्नेह जब कलाई पे छा जाता है,
रक्षाबन्धन के पावन पर्व को परिभाषित कर जाता है..!!!

खट्टे मीठे लम्हों की याद लिए धागा बंध जाता है,
फिर साथ बिताई यादों का कोहिनूर बन जाता है !!
खुद सूरज सा जलकर जब चाँद, बहन को बना जाता है,
तब सफलता, समृद्धि, स्नेह का बहन से "आशीष" मिल जाता है..!!!

सूत्र बाँध रक्षा का जब रक्षा-वचन लिया जाता है,
वचन निभाने को फिर, हर लक्ष्य को छू जाता है !!
दिये सा जलकर उसका तेज अँधियारा मिटाता है,
भाई - बहन के प्रेम का "प्रतीक", धागा बन जाता है..!!!

तर होके धागा स्नेह प्यार में, विश्वास अंकुर कर जाता है,
नाजूक सा धागा न जाने, कैसे रक्षा करता है !!
इसी विश्वास की अमिट छाप जब कलाई पे अंकित होती है,
बंधा हुआ वो नाजूक धागा, "रक्षासूत्र" कहलाता है..!!!