Wednesday, July 17, 2024

तुम चाँद बन जाओ

सुनो.... तुम चाँद बन जाओ,

मैं हर दिन,

रात का इंतजार किया करूँगी...

और ऐसी ही किसी रात,

दबे पावँ छत पर चले आना 

तुम्हारे आने पर कुछ सितारे चमका दूँगी

और

थोड़े बादल बिछा दूँगी...

गर कोई आ जाए, तो अंधेरे में कहीं छुप जाना 

फिर आना, मेरे पास...

उन्हीं बादलों में कहीं बैठ जाना

मैं तुम्हारी गोद में सो जाया करूँगी...

जानती हूँ, तुम्हें कविताएं पसंद हैं 

मैं तुम पर दर्जनों काव्य लिखूंगी

फिर इत्मीनान से बैठना मेरे पास...

एक-एक करके सब सुनना,

गर अच्छा लगे कुछ 

तो थोड़ी तारीफ भी कर लेना...

क्या करते हो? कहाँ रहते हो?

ये सब ज़रा विस्तार से बताना 

कुछ ऐसा भी बताना कि बंद ना हो मेरा इतराना

जो मांगू वो देना, इतना अधिकार तुम मेरा जानना,

एक अंगूठी में जड़वाकर अपना स्याह भाग मुझे पहनाना,

फिर जाते-जाते कुछ ना कहना, बस एक वादा करते जाना,

गर तारा कोई टूटे, तुम मुझे मांग लेना।


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