Monday, July 27, 2015

"भाई" तू याद बहुत आता हैं !!

डरा हुआ सा, कुछ सहमा सा, आँसु बहता जाता हैं,
आँखों से हो विदा वो, मोम सा पिघलता हैं !!
रोती हुई उन आँखों को जब कोई नहीं हँसाता हैं,
ऐसे पल में भाई तू याद बहुत आता हैं...!!!

कुछ घबराता, कुछ सिसकता आँसु सब कह जाता हैं,
अकेली सी, उन आँखों में सिर्फ दर्द ही कहराता हैं !!
मुरझायी हुई पलकों को जब कोई नहीं सहलाता हैं,
ऐसे लम्हों में भाई तू याद बहुत आता हैं...!!!

भूली हुई उन यादों से रंग छीन ले जाता है,
बिन पतवार ही वो अपना रास्ता बनाता हैं !!
ख़ामोशी का आलम बनके सिसकिया सुनाता हैं,
ऐसे पल में भाई तू याद बहुत आता हैं...!!!

सुनी करके हँसी को अपने पास ही रख लेता हैं,
लबों की मुस्कान को, मायूसी बना जाता हैं !!
आँसुओ को रोकने वो हाथ जब नहीं आता हैं,
ऐसी घड़ी में भाई तू याद बहुत आता हैं...!!!

आँखों को दे सूनापन, घुम कही हो जाता हैं,
जाते जाते होंठो पे एक झूठीं मुस्कान दे जाता हैं !!
डरी हुई आँखों को जब पलके गले लगाती हैं,
ऐसे लम्हों में भाई तू याद बहुत आता हैं...!!!

बीती हुई उन यादों का आयना दिखता हैं,
होके दूर आँखों से, हाथों में कैद हो जाता हैं !!
प्यार देखकर तेरा इतना आँसु भी रो देता हैं,
ऐसे पल में भाई तू याद बहुत आता हैं...!!!

सूनी पड़ी उन गलियों में, याद वो बचपन आता हैं,
तब यादों में दबी कलम की स्याही वो बन जाता हैं !!
कागज़ को छूता ये आँसु, बस यही समझाता हैं,
अब हर घड़ी, हर पल भाई तू याद बहुत आता है...!!!