Wednesday, January 17, 2018

"माँ मै ख़ुश हूँ"

माँ मै ख़ुश हूँ।

हाँ कभी-कभी उदास हो जाती हूँ।
और फ़िर अकेले मे आँसु भी बहाती हूँ।
पर तेरा चेहरा देख मुसकुराने फिर लगती हूँ।। 

हाँ कभी-कभी मन नहीं लगता।
कुछ खोई-खोई सी रहती हूँ।
पर तेरी यादों को याद कर मुसकाती चली जाती हूँ ।।

हाँ माँ मै ख़ुश हूँ। 

कभी-कभी यू ही रोने लगती हूँ।
बिन बात के गुस्सा करती हूँ।
फिर तेरी हँसी देख खुद भी हँसने लगती हूँ।।

कभी-कभी अँधेरा डराने लगता हैं।
अँधियारे में आँखे मुंद लेती हूँ।
फिर बातों को याद कर तेरी, हिम्मत आ जाती हैं।। 

हाँ माँ मै ख़ुश हूँ। 

कभी-कभी दिल सूना सा लगता हैं।
हर तरफ ख़ामोशी-सी लगती है।
तब साथ बिताए पलों को याद कर खुश मै हो जाती हूँ।।

कभी-कभी अकेला सा लगता हैं।
दिल बेचैन हो जाता हैं।
फिर तेरे एहसास से सुनापन दूर हो जाता हैं।।

हाँ माँ मै ख़ुश हूँ।

तेरी ही परछाई हूँ, तेरे जैसी ही हूँ।
तेरा ही चेहरा है, तेरा ही सब कुछ।
फिर भी तेरी ज़रूरत है.... 
क्योंकि सबसे अलग है तू।।

हाँ माँ तेरा साथ है तो, ख़ुश हूँ मै......