Friday, April 10, 2015

हज़ारो ख्वाबों को यू आँखों में बसा बैठी,
पूरा उन्हें करने की, नाकाम कोशिशें कर बैठी,
आज खुशियाँ रूठ गयी मुझसे,
मैं गमो से दोस्ती कर बैठी....!!

चाहत थी फूलों सी खिलखिलाने की,
हसरत थी आँसूओ को मिटाने की,
आज फूल रूठ गए मुझसे,
मैं कांटों से दोस्ती कर बैठी....!!

थी आदत मुझे पल पल मुस्कुराने की,
अकेले में खुद से गुनगुनाने की,
आज मुस्कान रूठ गयी मुझसे,
मैं आँसूओ से दोस्ती कर बैठी....!!

क़ोशिश थी सबको ख़ुश कर देने की,
सबके दिलों से ख़ामोशी हटाने की,
आज अपने रूठ गए मुझसे,
मैं ख़ामोशी से दोस्ती कर बैठी....!!

शांत पलकें कुछ यू फड़फड़ा उठी,
जलते हुए पानी से आज भीग उठी,
रोकना चाहा बहूत पलकों ने,
पर आँसूओ की वो धारा आज खुदखुशी कर बैठी...!!!!

2 comments: